साल २०२५बिदा, साल २०२६ स्वागत
जाणि वाल साल बिदा तू कै
सुख-दुख द्विनूं बाटी दीं।
गिरि-पड़ि बै जे सिख मिलि
तूल जीणूं ढंग समझाई दीं।
आणि साल, स्वागत छ तेरो,
नयी उज्यालो, नयी सवेरो।
टूटी सपन फिर पंख पावो,
हर मन मा मुस्कान भरि जावो।
जो छूटि गो याद बणि रो
जो मिलि गो संग निभैं जो
बीति दिन अनुभव बणि जो
जाणि साल—धन्यबाद तेरो
आणि साल—खुशी बसै जो।
देव सती पहाड़ी बटोही
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