शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

ब्याक पोस्टमार्टम

गौं में रुणी वाल च्यल और ब्याक फॉर्म
— देव सती (पहाड़ी बटोही)
गौंक च्यल लैन में ठाढ़ है र
हाथ में कुनई, दिल में भरोस ल्ये र।
च्यैलि वाल पूछनि:
“नौकरी कै करु?”
बस यई रिश्त मर र।
च्यल कू:
“गौं में खेती करनू, ईज बाज्यूक सहार छू।”
च्यैलि वाल कूनी:
“अरे! य त सब टैम पास छ।
तिपर सब डिग्री छ, पर पैकेज न्हैती।
संस्कार छ, पर सैलरी न्हैती।
ईमानदारी भारी पड़ गै च्यला,
क्यैलैकि त्यर बैंक में डबल न्हैति।
शहर में हमर च्यल लै ओपिसु में चहा पैऊ,
उ लै ‘सेटल’ छ।
च्येलि न्हैति दोषी इमें पूर,
उकैं सिखाई गै मजबूरी।
‘खेती-पाति, घरबार बाद देखियल,
पैली बैंक बैलेंस ज़रूरी।’”
गौं क च्यल फिर पू छू:
“क्यै मैं इंसान न्हैति?”
जवाब उ:
“छै, त सई नै, पर हमर च्यैलिक लेक न्हैते।”
च्यैलि क घर जाओ तो दै ख हमूल।
च्येलि क ददा ले भै रोछी:
“पूछो, उन्हू तुम क्य़ै करछा?”
बढ़ मुस्करातें हुए क आई त कै नी करन,
पै हमूंल क जवैं लिजी शर्त भारि।
बैणी क ब्योल चै सरकारी,
तुम खुद छा बेरोज़गारी में,
हमूहू कुरछा हम छू सरकारी नौकरी क तैयारी में।
ए घर, द्वी माप,
यई पहाड़ क कड़ू हिसाब।
कटु सत्य, मगर साफ़ बात,
रिश्त अब मेहनत ना हालात देखनि आज।
य एक खा लि कविता न्हैति,
रिश्तों क पोस्टमार्टम रिपोर्ट छ।
जा बेरोज़गारी अपराध छ,
और पहाड़ आपण गौ में रुण वी है बै ले ठूल अपराध।

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