कुमाऊँ का गाँव : विकास क नाम पर विनाश
आज़ादी बाद कुमाऊँ का गौं गौंनों मे विकास क नाम पर खेल चलो
हर साल पैड़ लगाई , हर साल फोटो खिंची
पर जंगल आज ले नंग छन।
पौध लगै दी, पर बचै कतुक?
जंगोव क नाम पर सोंव भरि गो
पानी सूखि गो, माटी सरकण लाग गो
काग़ज़ मै हरियाली,
गौं मा सुवर बानरों क उजाड़।
सड़क क नाम पर पहाड़ काट दी
न तो ढाल समझी, न पाणिक धार।
आज सड़क छ,
भों भूस्खलन छ।
खेत गो, घर गो,
पर रिपोर्ट मे सब ठीक छ।
पाणि बचाण क योजना बनी।
नौला बूसी गी धारा चुप छी।
खाल खन्ती काग़ज़ मा चलि,
गों मै पाणिक टंकी आय ले सुन्न छी
सबूहें ठूल गलती
गौंक आदमी क कोई मोल न्हैति
स्याण बलो त चुप करै दीनि
ठेकेदार बलो त योजना पास।
विकास अगर यई छ,
तो पहाड़ कसिक बचाल?
हर साल काम हूण बटि मतलब न्हैति
काम ठीक कसिक हल
पहाड़ कै बचाण छ,
तो दिखावा छोड़ों।
माट ज सीख,
पाणि ज चल,
अर गौंक आदिम है पूछ।
नतर य विकास
सिर्फ़ नक़्श मे रै जाल,
और गौ याद मा।
देव सती पहाड़ी बटोही
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