🔥 सगट में धरी क्वैल
(कुमाऊनी राजनीतिक व्यंग्य)
सगट में धरी क्वैल जस,
राज चलणो छ चुपचाप,
मंचन में ठंड हँसण,
भितर-भितर जलणो छ ताप।
नेताजी बोलि — सब ठीक,
महँगाई बोलि — चुप र,
जनता हाथ लगै भैठी,
हाथ जली, आवाज़ ए गुम र।
कागजन में विकास चमकण,
धरातल माजूण जस ठंड,
सवाल करो जो आम आदिम,
वी पर मुकदमा — देशद्रोही।
वोट बखत फूँक मारण,
क्वैल जलो त फोटो खिंचो,
सगट सरकार हाथन में छ,
क्वैल जनता की साँस।
जैं दिन सगट उलटि जाल,
उ दिन बदलल इतिहास।
✍️ पहाड़ी बटोही (देव सती)
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