🌿 हरेला 🌿
ग्य जौ अर घ्व्ग का बीज
यैल हर्याव शुरू होल।
डालि म बोई जाल
नौ दिन अँन्यार मे रौल।
फूलदेई, होली क ज
किसाणक यो त्योहार छ।
हमरि संस्कृति रीत-रिवाज
सबक आधार हर्याव छ।
अन्न-धन अर सुख-समृद्धि
हर्याव क चिन्ह माणी जाल।
बड़-बुजुर्ग आशीष द् याल
जीवन हरियाल बणाल
नौ दिन बाद पतीशी जाल
देवता लै पैलि चढ़ाल।
तिलक, अक्षत, चन्दन लगैबैर
घर-घर प्रसाद बाँटि जाल
आओ सब मिलि प्रण करौं
एक-एक पेड़ जरूर लगौल।
फोटो खींचण भूल नि जौल
उकै पाणी द् योल, संभालूल।
हर साल पेड़ त लगांल
पर बचांई कतू जांल?
य बात सब कै समझौल
धरती मैया क ऋण चुकौल।
हरेला क पावन दिन मे
धरती मैया क श्रृंगार करौल।
हरिया उत्तराखण्ड बणौल
आण वाली पीढ़ी लै उपहार
द् योल ।
🌿 आपूं सबों कै हरेला पर्व की हार्दिक बधाई! 🌿
सिर्फ़ पेड़ लगौण काफी नि छ
उकै बचौण, पाणी दिण और पालण भी हम सबकी जिम्मेदारी छै।
देव सती "पहाड़ी बटोही"
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