सोमवार, 20 जुलाई 2026

भजन


मेरा एक साथी है... बड़ा ही भोला भाला है...
मेरा एक साथी है बड़ा ही भोला भाला है,
मिले न उस जैसा वो जग से निराला है।
जब-जब दिल ये उदास होता है,
मेरा मुरली वाला मेरे पास होता है।
मेरा एक साथी है बड़ा ही भोला भाला है।
जब तक रहा अकेला बड़ा दुःख पाया मैं,
जब-जब दुःख ने घेरा तो घबराया मैं।
ये सारी दुनिया में कन्हैया का सहारा है,
मिले न उस जैसा वो जग से निराला है।
जब-जब दिल ये उदास होता है,
मेरा मुरली वाला मेरे पास होता है।
मेरा एक साथी है बड़ा ही भोला भाला है।
सब कुछ बदल गया है उसके आने से,
हिम्मत आई है उसके समझाने से।
हँसा मैं जब-जब भी उसी ने तो निकाला है।
जब-जब दिल ये उदास होता है,
मेरा मुरली वाला मेरे पास होता है।
मेरा एक साथी है बड़ा ही भोला भाला है।
नई-नई पहचान बदल गई रिश्तों में,
बनवारी मेरा सौदा पट गया सस्ते में।
गिरा मैं जब-जब भी उसी ने तो संभाला है।
जब-जब दिल ये उदास होता है,
मेरा मुरली वाला मेरे पास होता है।
मेरा एक साथी है बड़ा ही भोला भाला है।

शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

जिंदगी रहते रहते बुजुर्गों की सेवा कर लो और अपना अभिमान उनके चरणों मे रख दो

जिंदगी रहते-रहते बुजुर्गों की सेवा
जिंदगी रहते-रहते अपनों का मान कर लो,
माँ-बाप, बुजुर्गों का थोड़ा सम्मान कर लो।
जब तक सिर पर उनका साया बना हुआ है,
उनके चरणों में अपना अभिमान धर लो।
कल तस्वीरों पर फूल चढ़ाने से क्या होगा,
आज उनके संग दो पल बैठकर प्यार कर लो।
दवा से पहले मीठे बोलों की ज़रूरत होती है,
उनके चेहरे पर मुस्कान का उपहार कर लो।
समय का पहिया कब किस ओर मुड़ जाए कौन जाने,
जो करना है, आज ही दिल से कर लो।
क्योंकि... चिता की आग से पहले,
जीते-जी सेवा का दीप जलाना सीखो।
श्रद्धांजलि से बड़ा पुण्य,
बुजुर्गों की मुस्कान है।
अम्मा आपको श्रद्धांजलि

बुधवार, 15 जुलाई 2026

हरेला

🌿 हरेला 🌿
ग्य जौ अर घ्व्ग का बीज
यैल हर्याव शुरू होल।
डालि म बोई जाल
नौ दिन अँन्यार मे रौल।
फूलदेई, होली क ज
किसाणक यो त्योहार छ।
हमरि संस्कृति रीत-रिवाज
सबक आधार हर्याव छ।
अन्न-धन अर सुख-समृद्धि
हर्याव क चिन्ह माणी जाल।
बड़-बुजुर्ग आशीष द् याल
जीवन हरियाल बणाल
नौ दिन बाद पतीशी जाल
देवता लै पैलि चढ़ाल।
तिलक, अक्षत, चन्दन लगैबैर
घर-घर प्रसाद बाँटि जाल
आओ सब मिलि प्रण करौं
एक-एक पेड़ जरूर लगौल।
फोटो खींचण भूल नि जौल
उकै पाणी द् योल, संभालूल।
हर साल पेड़ त लगांल
पर बचांई कतू जांल?
य बात सब कै समझौल
धरती मैया क ऋण चुकौल।
हरेला क पावन दिन मे
धरती मैया क श्रृंगार करौल।
हरिया उत्तराखण्ड बणौल
आण वाली पीढ़ी लै उपहार 
द् योल ।
🌿 आपूं सबों कै हरेला पर्व की हार्दिक बधाई! 🌿
सिर्फ़ पेड़ लगौण काफी नि छ
उकै बचौण, पाणी दिण और पालण भी हम सबकी जिम्मेदारी छै।
 देव सती "पहाड़ी बटोही"

सोमवार, 13 जुलाई 2026

काश इस बार... (व्यंग्य कविता)




काश इस बार उत्तराखण्ड में ऐसी सरकार बने,
जो भाषण नहीं, हिसाब देने का साहस करे।
हर चुनाव में वही पुराना गीत—
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार की बात,
जीत मिलते ही सब गायब,
जनता फिर अकेली रात।
विद्यालयों में ताले लटके,
अस्पतालों में डॉक्टर कम,
रोज़गार की राह न दिखी,
युवा भटकते कदम-कदम।
पलायन की पीड़ा पूछो,
सूने पड़े हैं गाँव,
नेता जी मंचों पर कहते—
"देखो, कितना हुआ विकास!"
घोषणापत्र में सपनों की खेती,
धरती पर सूखा हाल,
फीते कटते, फोटो छपते,
जनता पूछे—"काम का क्या हाल?"
नेता जी!
आप शासक नहीं, जनसेवक हैं,
इतना तो याद रखिए।
कुर्सी जनता की अमानत है,
इसे विरासत मत समझिए।
जिस दिन शिक्षा बिकना बंद होगी,
स्वास्थ्य भटकना छोड़ देगा,
रोज़गार घर-घर पहुँचेगा,
और पलायन रुक जाएगा—
उसी दिन जनता कहेगी,
"अबकी बार सचमुच सरकार बनी है,
सिर्फ़ सत्ता नहीं।"
पहाड़ी बटोही

रविवार, 12 जुलाई 2026

जून न्हैं गो

जून न्हैं गो, पहाडो़ं रौनक लै न्हैं गै
क्वैं शहर न्हैं गो, क्वैं भाबर न्हैं गो..
और दगाड़ में लि गई प्याज कट्ट, पूलम, खुमानी, बेडू, तिमिल फोटो खिचीं स्यट...
और जन तका कै गई, असोज में भेज दिया पिहव काकड़,लाल गदू, मूवक फांच...
उ आइ, कुछ दिन बढ़ें गई गौंनौं  मे चहल-पहल...
कुछ हमूहें सीख बैर, कुछ हमूहैं सीखें बैर...
सीख बैर गई आलू थैचूं और भट्टाक डूबुक बनूण , हमूकैं सीखैं बैर गई जन्मदिन-सालगिरह मनूण, रील-ब्लॉग बनूण, किटी पार्टी करण, कारों में, धारों में, गौंनौं क बजारु में...
देवी-देवताओं क मंदिरों में बजै गई घंटी, बतै गई इनर धार्मिक महत्ता... 
आपणि तो मजबूरी बतै बैर, समझै गई हमूकें क्यारीं, खेतबाड़ी, गौरु-भैंस पालण, स्वरोजगार क फैद...
बस कुछै दिन ठाड़ी रई, गौंनौंक तलि-मलि सारियों में लाल-सफेद चमचमान कार, जो सरपट दौड़बैर फिर आघिल क्वैं कामकाजों में आल, हमर हाथ ले बटाल...
आब हमर यकलैपन कें देख बैर, ऐ गै रिमझिम बरखा क बूंद, निकल ऐ गई घा कोंपल, डानूंक उड़ी कूहर...
आब तो छौय ले फूटाल, गध्यर लें पुकारंल, उनूकें तरसाल, हर्षाल, और फिर यई बूलाल...
जय देवभूमि, जय उत्तराखण्ड।
— देवसती पहाड़ी बटोही

शनिवार, 11 जुलाई 2026

"भल् जै के हूँ पै?"

टेक : "भल् जै के हूँ पै?"
श्रीमान हीराबल्लभ पाठक जी की पंक्तियों को आगे बढ़ाते हुये कुछ और आगे

बिदेश बसी च्यल असोजक कर्र्यल भल् जै के हूँ पै?
दबंग है अर्ज पधानक कर्ज
चटोर सैंणि द्व्ब लागणी मैंस
मतलबी यार दुख मैं फरार 
मोबाइलक नशा
भुली गै भाषा
रीलक शौक छुटिगै य लोक
दिखावक ठाठ,खाली बात
झूठी सान खोई पहचान
लोभक धन,बेचैन मन
उधारक ठाठ,घाटै घाट
काम बिना बात,दिनभर गप्प
नशेडी़ भाई,घरकि लड़ाई
ईजाक सीख,लागे अब फींक
बाज्यूक बात,छोड़दी जात
जंगल काट,सूखिगै गाड़
खेत बंजर,बैठो घरपर
दहेजक रीत,टुटिगै प्रीत
चुनावक वादा,भुलिगै इरादा
नेताक भाषण,खाली आश्वासन
घूसक चाल,जनताक हाल
मीठी बोली,भीतेर ठगी
नामक दान,मन मैं अभिमान
मेहनत छोड़,भाग्यक होड़
महँगो बजार,खाली उधार
रोजगार दूर,बैठो मजबूर
कागजक काम,चक्कर तमाम
अफसरक चाल,जनताक हाल
सिफारिस जोर,मेहनत कमजोर
झूठक साथ,बिगड़िगै बात
दिखावक मान,खाली सम्मान
धनक घमण्ड,टुटिगै सम्बन्ध
ईजा अकेले,च्यलक खेल
बाज्यूक आस,फोनक विश्वास
भाषाक लाज,भुलिगै आज
अपणि रीत,छोड़िगै प्रीत
फोटो हजार,सेवा बेकार
कुर्सीक प्यार,जनता बेकार
दूसरक दोष,अपणो नै होश
धर्मक नाम,फैलिगै दाम
साँचक बाट,सबूलैं काट
ठय्कक खेल,जनताक तेल
नेताक हँसी,जनताक फाँसी
भाषण भारी,जेब  खाली
रिश्वतक चाल,बिगड़िगै हाल
पैसाक मान,भुलिगै ईमान
फोटो खिंचाण,कामक  स्याण
सेल्फीक शौक,भुलिगै लोक
खेत बिकाण,सहर बसाण
गौ-गोठ सूनी,बज्यूँणैकि धूनी
घर मैं ताल,भ्यार कमाल
ब्याक ठाठ,उधारक बाट
दाज्यूँक मार,भुलिगै भाईचार
मन्दिर भीड़,मन मैं पीड़
झूठक जीत,हारिगै प्रीत
कपटी यार,भितर वार
पैसाक जोर,साँचो कमजोर
रिश्ताक डोर,स्वार्थक छोर
कर्जक शान,बेचैन प्राण
दिखावक दान,मन मैं गुमान
घरक बँटवार,टुटिगै प्यार
गौंक खेत,उगिगै घास
पनघटक गीत,भुलिगै प्रीत
ढोलक थाप,मोबाइल जाप
मेलाक रौनक,रैगै कौतिक
अपणि बोली,भुलिगै टोली
लालचक चाल,बिगड़िगै हाल
झूठक राज,साँचो लाज
अपणो माट पानी,बेचणि ठानी
भाषाक मान,यै छै पहचान
माटीक गंध,जीवनक सुगंध
अपणो गाँव,मिलजुल रै
अपणि संस्कृति तबै बचै
तब भलो सब हूँ पै।