मंगलवार, 18 नवंबर 2025

चाय सोशल मीडिया और पहाड़

🍃 चाय, सोशल मीडिया और पहाड़ 🍃

पहाड़ैं मे चहा  कम, स्टेटस ज्यादा बनौला,
कप ठंडो पड़ि जाला—
पर फोटो “Hot Tea Time”  लगौला।
चौंतरा खाली, पर ग्रुपचैट भरल,
रात-दिन “GMचललो,
उतरण न पड़े घर–बार मैं,
रील मैं ही पहाड़ पललो।

फेसबुक मैं सब–सबूक फिकर,
“देश–दुनिया” बचूण,
और घर मैं दगड़–धूप पड़ै—
पर लाइक-कमेंट मैं लगूण।

चाहा पियू कि न पियू—
फर्क न छ, बस फोटो आलो चाहिं,
कैप्शन लिखूं—
“Life in Mountains ☕✨ #Peace #Vibes #Nature”

चाय कि भाप उड़ी–उड़ी
सोशल मैं फैलि जाली,
हकीकत कि चुस्की सूखी—
पर वर्चुअल जिंदगी चलि जाली।

घाम कि किरन जागीं, चूला भट्टियूँ में आग,
पहाड़ कि गलियाँ बोलि उठीं — “बनौ चहा, ऐलाग!”
कितली में उबलूं पत्ती, जड़-बुटि को सुगंध,
पहाड़ैं क ठंड में चाहा— खुद में ही एक प्रबन्ध।

चौंतरों में बैठि- बैठि, चुस्की-चुस्की दिन कटि जाल,
चाय कि चम्मच जैं घूमें, मन मे घुमण-फिरण लागि जाल।

थकानक जाड़ा खाईं, ब्यथा-म्यथा सब भाग जाल,
चाहा कि दो घूँट पियू निनान ले जाग जाल।
! ☕देवसती (पहाड़ी बटोही)

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