एक बीसी पॉंच साल क उत्तराखंड देखों कस बीत गो
पच्चीस साल क उत्तराखंड कस आज है गो।
कुमाऊँनीं क मधुरता का गै
गढ़वाली क गहराई का गै
जौनसारी त हराई गो
फूलदेई घूगूती त्यार
हरर्याव त्यार हरई गो
पहाडो़ं विकास आज काथा आज
न्हैं गो
कुर्सी क दौड़ में कभैं कमल तो कभैं हाथ जीत गो।
आवाद छी जो खेत बाडी़, उ सब बंजर पड़ गो
पुश्तैनी मकानों क बूनैदू कै पलायन जर्जर कर गो।
पहाड़ों क रौनक गौ गौनों के सुनसान कर गो!
विकास पहाड़ों में आन है पैली, धरातल मे डर गो!
स्कूलों में लटकि ताव, अस्पतालों में सन्नाटा छ!
सड़कों को जाल बिछा पर, रोज़गार का कई ना अत्त -पत्त छ!
गध्योरों क कल-कल, फूलों क खुशबू, सब फीक कर गो!
जवानी क जोश के पहाड़ों बै, शहरों क ओर भबरै गो!
देवभूमि क नाम तो छ, पर द् य्प्तों क वास का?
मंदिरों के कपाट खुली छ, पर उ भक्तों का विश्वास का?
शहादत क बल पर मिलों छि , हमूंके य धाम,
आज ले विकास क नाम पर, पहाड़ों के मिलरो आराम!!
चलो फिर से संवारुल मिलकर, अपण उत्तराखंड के
विकास की नई राह दिखूल , रोकूल पलायन के
संघर्षों ल जो जन्मी रो
उ स्वाभिमान क शान छ
देवभूमि उत्तराखंड,
त्यर हर शहीदों पर अभिमान छ
हम उत्तराखंडवासी छू
संघर्ष हमैरी पहचान छ
संस्कृति हम री साँसों में,
शौर्य हम र मान छ
देवभूमि के हर अंश में,
बसू हिन्दुस्तान,
जय-जय उत्तराखंड हमरी —
जय भारत, जय देवभूमि महान!
@देव सती (पहाड़ी बटोही)
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