🇮🇳 1996 का वो 15 अगस्त… 🇮🇳
जब से मुझे याद है, स्वतंत्रता दिवस की पहली धूमिल-सी याद प्राइमरी पाठशाला घिंगारी की है, जब मैं कक्षा तीन में पढ़ता था।
उम्र छोटी थी, इसलिए उस दिन की बहुत-सी बातें अब धुंधली हो चुकी हैं, लेकिन कुछ तस्वीरें आज भी मन में ताजा हैं—स्कूल का छोटा-सा मैदान, बच्चों की कतार, तिरंगा, प्रार्थना और गूंजते हुए नारे—“भारत माता की जय!”
“वंदे मातरम्!”
“जय हिंद!” 🇮🇳
उस समय आज़ादी का अर्थ पूरी तरह समझ नहीं आता था, बस इतना पता था कि तिरंगा हमारा है और भारत हमारा देश है।
और फिर आता था सबसे खास पल—स्कूल में मिलने वाली वो गोल खट्टी-मीठी टॉफी।
आज सोचता हूँ तो लगता है, मिठाई कितनी छोटी थी, लेकिन खुशी कितनी बड़ी थी।
न मोबाइल था, न सेल्फी, न सोशल मीडिया।
हम तस्वीरें कम खींचते थे, लेकिन यादें बहुत बनाते थे।
आज भी 15 अगस्त आते ही वो स्कूल, वो दोस्त, वो शिक्षक, वो तिरंगा और वो टॉफी याद आ जाती है। समय बदल गया, बचपन पीछे छूट गया, साथी अपनी-अपनी राह चले गए… लेकिन 1996 का वो 15 अगस्त यादों में आज भी वैसा ही है।
आज तिरंगा देखकर उन सभी वीरों को नमन करता हूँ, जिनके बलिदान से हमें आज़ादी मिली।
भारत माता की जय!
वंदे मातरम्!
जय हिंद! 🇮🇳
तब हाथ में एक छोटी-सी गोल टॉफी थी,
आज हाथ में उसकी मीठी याद है। पुनः आप सभी को स्वतंत्रता दिवस कि हार्दिक शुभकामनॉयें जय हिंद🇮🇳
देव सती पहाड़ी बटोही
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