सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

पहाड़ कै छोडबैर शहर जाण पडो़

पहाड़ के छोडबैर शहर जाण पडो़
मन नी लाग वा पर लगूण पडो़
बाजे बोटों को छॉव बाखई की बात
सब मूबैलें की स्क्रीन मे खोजण पडो़
ईजा की रोटी मडूव रव्टाक स्वाद
या पिज्जा बर्गर गव उतारण पडो़
गौं मा खेत सूख गया गध्यार रुठ गया
कागजों मे विकास छपाण पडो़
नेता मंच बटि छाती ठोकी बोली गयो
रोजगार भरमार पलायन रुकी गयो
जाणि कस तुमार ख्वर बज्जर पडो़
गौ मा स्कूल छ मास्टर न्हैती
अस्पताल छ डाक्टर न्हैती
रिपोर्ट मे चकाचक जमीनें धूल उडी़ पडो़
फार्म ले भरो और फीस ले भरो
लेन मे खालि ठाड़ दिन गवाण पडो़
फिर रिजल्ट ले स्थगित है ई पडो़
डिग्री हाथ मे छ जैब छ खाली
नेताओं लिजी खालि बजाओ ताली
नि मिलेरई नानि जा न्हैती नौकरी सरकारी
रुजगारे चक्करम पलायन है ई पडो़
राजनीति क पैट भराण खातिर
हम भीड़ मे भीतेर घूसीण पडो़
वोट दिन तका दिन भर लैनों मे ठाड़
फिर पॉच बरस भुलाण पडो़
जब जड़ पूर सूख जाल
तब पहाड़ के हिलाण पडो़
लेखी है लो कागज म
तबै ते बूलाण पडो़
भलि लागली य बाता
कमेंट करना रया
विडीयो के आघिल सरकाते रया
आज मन नी लाग शहर मा
पर पेट खातिर झुकाण पड़ो।
जड़ सूखगीं जब मातृभूमि की
तब पत्थर के ले  हिलाण पड़ो।
जब जागि जाल नौजवान
तब सत्तन क सिंहासन डोलाण पड़ो।
झूठ क कागज फट जाल जो दिन मे
सच क मूछ्याव फिर जलाण पड़ो।
अब चुप बैठणो पाप होलो
आवाज के उठाण पड़ो।
अपणों हक, अपणों पहाड़ खातिर
भीड़ नि, तूफान बनाण पड़ो।
नारों  सिर्फ लगाणे ले  नी होलो,
हक सच में दिलाण पडलों।
जगाण पड़ो, ललकारण पड़ो,
अब पहाड़ के  बचाण पड़ो
@देव सती पहाड़ी बटोही

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