आपके गाँवों ईनाण, चौना, गाड़ी और पाखुड़ा को शामिल करके कविता प्रस्तुत है-
चार गाँव का पैदल रास्ता अब बंद है
(ईनाण — चौना — गाड़ी — पाखुड़ा)
ईनाण की धूप से चलकर
चौना का साया मिलता था
गाड़ी मे पहुँचकर वह शिव धारा मिलता था
पाखुड़ा की ओर चढते ही
मिलता अपनापन हर पल,
संग चलते थे पाँव हमारे
बिना शिकायत, बिना हलचल।
वो रास्ता था चार गाँवों में
रिश्तों का सेतु महान,
हर त्योहार, हर दुख-सुख में
उसी से चलता था मान-सम्मान।
अब सड़कें तो आ गई हैं
पर दिल कहीं तंग है,
तरक्की की इस भीड़ भरे में
वो पैदल रास्ता बंद है।
जहाँ बाँझ क्यारी में
खिलखिलाती थी बचपन की धूप,
और पगडंडी के मोड़ों पर
हँसी छोड़ जाते थे रूप।
बंद हुआ जो रास्ता
मिट्टी का संग छूट गया,
बचपन कहीं वहीं पड़ा है
जहाँ से सफर टूट गया।
देव सती (पहाड़ी बटोही)