मंगलवार, 29 जुलाई 2025

शाबास म्यर मोतिया बल्दा

शाबास म्यर मोतिया बल्दा त्वीलें धारौ बोला
नौ रुपैं को मोतिया बल्दा सौ रुपैं को सींगा 
लोटि पडौ़ म्यर मोतिया बल्दा टोडि़ ल्यायों सींगा 

शाबास ़़़़़़़़़़
(बोई हाली मैथी बची रौलौ मोतिया बल्दा!
खूब करुंला खेती)
शाबास़़़़़़़़़़़
(धार में कि टूणी पहाड़ नें बसी गई बानर और गुणी )
शाबास़़़़़़़़़़़़
पहाडा़ का धार मजि मंदिरों का गेटा
इज बाबू कणि छोडि़  बेर च्याल ब्वारी देशा)
शाबास ़़़़़
(बूड़ बाणियों दाणा पहाड़ मे पलायनैं क मारा 
कुडि़ बाड़ी छूटी सारी छूटी सारी सारा )
शाबास ़़़़़़़़़़़
(कतू भली बोलि हमरी कतू भलि रीता
चांचरी और न्योलि छपेली कतू भला गीता )शाबास़़़़़़़़़़़
(किलै छोडो़ पहाड़ तुमूलें घर कूडी़  किला छोडी़ 
इज बाबुल बणाई हय हांटा भांटा टोडी़)
शाबास ़़़़़़़

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