बुधवार, 16 जुलाई 2025

हरेला

गेहूं,जौ और मक्का के बीजों से 
होती इसकी शुरुआत है।
डलिया में बोया जाता,अंधेरे मे रखा जाता,
कोई ना कोई बात है।।

बैशाखी, होली की तरह,
कृषि प्रधान त्योहार है।
हमारी सामाजिक,पारिवारिक और
धार्मिक सास्कृतियों का आधार है।।

अन्न,धन-धान्य् और प्रतीक
"हरेला" समृद्धि का ।
अंबर सा ऊंचा,धरती सा विशाल,
दूब सा विस्तार,आशीर्वाद है वृद्धि का ।।
ऋतु परिवर्तन का सूचक,
पर्व हरियाली का होता है।
आशीर्वाद मिलता है बड़ों का,
वातावरण ख़ुशहाली का होता है।।
नौ दिन रहता अँधेरे में, 
पतीशा जाता दसवें दिन ।
तिलक चन्दन अक्षत से अभिमंत्रित होता।
देवों को होता प्रथम अर्पित,
शुरु ना होता पूजा बिन।।
 एक पहल हम सब
मिलकर इस बार करें।
हरेला के पावन पर्व पर,
*वृक्ष लगाकर, धरती का श्रृंगार करें।।*

*आप सभी को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं*

देव सती(पहाड़ी बटोही)

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