श्री रामचंद्र कह गये सिया से, ऐसा कलयुग आयेगा,
पहाड़ी नौकरी की खातिर शहरों में उम्र बितायेगा,
और डोट्याल जंगल घूम-घूम कर काफल-हिंसालू खायेगा।
जिस गाँव ने पाला-पोसा,
वहीं ताला लटक जायेगा,
घर की चौखट रोती रह जाएगी,
और मालिक शहर में “सेटल” कहलायेगा।
ना खेत बचेंगे, ना गौशाला,
ना चौपाल में बात होगी,
बस व्हाट्सएप स्टेटस में
“मेरा उत्तराखंड” की बात होगी।
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