बुधवार, 18 मार्च 2026

हिन्दू नव वर्ष

🚩रौद्र  नाम संवत्सरे २०८३

जय हो सनातन धरम की गूँज चारों धाम
रौद्र संवत्सर ऐ गो ल्यौ खुशियों को नाम
सब सनातनी जन-जन कै नव साल क बधाई
चैत्र मास क पैल तिथि में नई शुरुआत आई
उन्नीस मार्च गुरुवार दिन नई साल लागौ
नवरात्रि संग माता आई हर आँगन उज्यालौ
मन में उठ्ठो एक सवाल? अमूसी दिन क्ये बात?
कसी लागी नवरात्रि क्ये छ इनर साफ जवाब?
शास्त्रों में साफ लैख र 
 जौं प्रतिपदा नि आई
त पैंल दिन त्योहार मान्य सदा ठहराय।
धर्म ग्रंथल य बात समझाय
जो तिथि सूरज संग नी हो पैल दिन मनाय
भोर में अमूस छूटी जा रै छ बजी तिरपन मिनिट
तब तक कलश स्थापना सई टैम निश्चित
भल नक्षत्र और शुभ योग साथ में आयो
पालकी में माता आई हाथी में विदा पायो
शुक्र चंद्र मिलि बनिगे शुभ योग क रास
भल काम बनाल खुशियों क प्रकाश।
ब्रह्म योग और शुभ असर जीवन रंग भरो
मीन राशि में शुक्र भै र चार ग्रह संग ठहरो
गुरु शनि सूरज,चंद्र मिल भल योग बनाल
शुभ फल सबोंके मिलाल जीवन सुखमय बनाल
साल दुई हजार छब्बीस में ग्रह बदलल चाल
गुरु दो बार राशि बदलाल बदलाल भाग्य का हाल
मिथुन छोड़ि कर्क में जाल फिर सिंह में आल
राहु केतु ले बदलाल
 जीवनक राह दिखाल
शनि मीन में बैठी रौल कर्म का फल दय्ल
मेष कुम्भ मीन साढ़ेसाती जीवनक पाठ सिखाल
सिंह धनु में ढैया लागी टैम-टैम पर परीक्षा ल्याल
भक्ति दान पूज पाठ ले सब संकट कट जाल
रौद्र नाम संवत्सर छ कभैं खुशी कभैं क्लेश
राजा-रजवाड़ा में टकराव दुनिया बदललि भेष
अन्न दाम और द् यों मध्यम चाल चलाल
समाज राजनीति में हलचल 
गुरु जब राज बनाल सुख-समृद्धि ल्याल
अन्न दूध और धनल हर घर भरि जाल।
यज्ञ हवन और पूज-पाठ, खुशियां गूंजै चार
हर जन खुश और हर मन प्रसन्न उत्सव अपार
मंगल साथ में शक्ति दय्ल हिम्मत और बल ल्याल
पर रोग और झगड़ बटि थोड़ा डर ले ल्याल
आग और बीमारी बढ़ाल सावधानी धरि ल्या
हिम्मत से काम करिया हर मुश्किल पार करिया
ग्रहण चार पड़ाल साल में भारत में नी दिखिय्ल एक
ना सूतक ना दोष लागल भल संकेत दैखिय्ल 
अंत में बात य समझो  धरम कर्म और ध्यान
सच्च मनल जो चलाल पाल सम्मान
हर आँगन में फूल खिलों हर चेहरे में मुस्कान
रौद्र संवत्सर ल्यों तुमूहू सुख-शांति और मान
🚩 नव संवत्सर २०८३ की हार्दिक बधाई 🚩
देव सती पहाड़ी बटोही

नव संवतसर

🚩रौद्र  नाम संवत्सरे २०८३

जय हो सनातन धरम की गूँज चारों धाम
रौद्र संवत्सर ऐ गो ल्यौ खुशियों को नाम
सब सनातनी जन-जन कै नव साल क बधाई
चैत्र मास क पैल तिथि में नई शुरुआत आई
उन्नीस मार्च गुरुवार दिन नई साल लागौ
नवरात्रि संग माता आई हर आँगन उज्यालौ
मन में उठ्ठो एक सवाल? अमूसी दिन क्ये बात?
कसी लागी नवरात्रि क्ये छ इनर साफ जवाब?
शास्त्रों में साफ लैख र 
 जौं प्रतिपदा नि आई
त पैंल दिन त्योहार मान्य सदा ठहराय।
धर्म ग्रंथल य बात समझाय
जो तिथि सूरज संग नी हो पैल दिन मनाय
भोर में अमूस छूटी जा रै छ बजी तिरपन मिनिट
तब तक कलश स्थापना सई टैम निश्चित
भल नक्षत्र और शुभ योग साथ में आयो
पालकी में माता आई हाथी में विदा पायो
शुक्र चंद्र मिलि बनिगे शुभ योग क रास
भल काम बनाल खुशियों क प्रकाश।
ब्रह्म योग और शुभ असर जीवन रंग भरो
मीन राशि में शुक्र भै र चार ग्रह संग ठहरो
गुरु शनि सूरज,चंद्र मिल भल योग बनाल
शुभ फल सबोंके मिलाल जीवन सुखमय बनाल
साल दुई हजार छब्बीस में ग्रह बदलल चाल
गुरु दो बार राशि बदलाल बदलाल भाग्य का हाल
मिथुन छोड़ि कर्क में जाल फिर सिंह में आल
राहु केतु ले बदलाल
 जीवनक राह दिखाल
शनि मीन में बैठी रौल कर्म का फल दय्ल
मेष कुम्भ मीन साढ़ेसाती जीवनक पाठ सिखाल
सिंह धनु में ढैया लागी टैम-टैम पर परीक्षा ल्याल
भक्ति दान पूज पाठ ले सब संकट कट जाल
रौद्र नाम संवत्सर छ कभैं खुशी कभैं क्लेश
राजा-रजवाड़ा में टकराव दुनिया बदललि भेष
अन्न दाम और द् यों मध्यम चाल चलाल
समाज राजनीति में हलचल 
गुरु जब राज बनाल सुख-समृद्धि ल्याल
अन्न दूध और धनल हर घर भरि जाल।
यज्ञ हवन और पूज-पाठ, खुशियां गूंजै चार
हर जन खुश और हर मन प्रसन्न उत्सव अपार
मंगल साथ में शक्ति दय्ल हिम्मत और बल ल्याल
पर रोग और झगड़ बटि थोड़ा डर ले ल्याल
आग और बीमारी बढ़ाल सावधानी धरि ल्या
हिम्मत से काम करिया हर मुश्किल पार करिया
ग्रहण चार पड़ाल साल में भारत में नी दिखिय्ल एक
ना सूतक ना दोष लागल भल संकेत दैखिय्ल 
अंत में बात य समझो  धरम कर्म और ध्यान
सच्च मनल जो चलाल पाल सम्मान
हर आँगन में फूल खिलों हर चेहरे में मुस्कान
रौद्र संवत्सर ल्यों तुमूहू सुख-शांति और मान
🚩 नव संवत्सर २०८३ की हार्दिक बधाई 🚩
देव सती पहाड़ी बटोही

शनिवार, 14 मार्च 2026

फूलदेई विरासत और सवाल

🌸 फूलदेई: विरासत और सवाल 🌸
आज पूछ बैठी मिहूं—
“क्यें छ य फूलदेई?”
मैं बोल्यूं—
पुरखों की विरासत छ,
पहाड़ को पावन लोकपर्व छ — फूलदेई।
मैं न्हैं थी हैरान,
सुदूर प्रांत की दगड़ी छी,
पर गहन छ पीड़—
जब पहाड़ का नान ही
नी जाणन — फूलदेई।
कभी गांव–गांव गूँजदा गीत,
देहरी-देहरी फूल बिछैं,
आशीष बरसै हर आंगन,
हँसदा बचपन — फूलदेई।
पर आज…
सूनी देहरी,
बंद पड़े मकान,
पलायन की चुप्पी में
कहीं खो गी — फूलदेई।
अब केवल
मोबाइल की स्क्रीन में
व्हाट्सऐप स्टेटस बनि गै —
फूलदेई।
पर याद कर—
जब भोर भयी, बसंत खिली,
फ्यूँली–बुराँश मुस्कान लई,
बाँस की टोकरी हाथों में,
फूलों की खुशबू आई।
चल बालको ध्यई–ध्यई,
गांव–गांव देहरी सजी,
बसंत की पैली बेला—
फूलदेई फिर आई।
फूलदेई, फूलदेई, फूल-फूल,
तुमार देई द्वार में ऊनै रूल।
मै कूनै रूल…
फूलदेई, फूलदेई, फूल-फूल,
छम्मा देई दैण द्वार,
ऊनै रूल बारम्बार।
आपूं सबौं कृपा अपार —
जगमग रहो पहाड़।
देव सती — पहाड़ी बटोही
#FoolDei #फूलदेई #उत्तराखण्डसंस्कृति #कुमाऊँ #गढ़वाल #पहाड़ #लोकपर्व #PahadiCulture #Uttarakhad

बुधवार, 11 मार्च 2026

श्रद्धांजली दिवान दा

श्रद्धांजलि – दिवान दा

द्वी दिनाका ड्यार छ यो दुनी मे,
गीत तुमारा अमर रो
रेडियो बटि गौं–गौं गूँजो,
सबकै मन भितर बसि रो
कैसेट, सीडी, मंचन में,
तुमरी धुनि झंकार रो
कुमाऊँनी लोकगायिकी 
तुम बड़ि ऊँचाई दिगो छा
दिवान दा तुम दूर न्हैं गो छा,
पर सुर तुमारा जिंदा छ
युग–युग तक याद करुला हम,
तुमरी आवाज़ सदा य दूनी मे गूँजते रों
🙏 विनम्र श्रद्धांजलि – दिवान दा

#दिवान_कनवाल #कुमाऊँनी_लोकगायक #श्रद्धांजलि #कुमाऊँनी_संस्कृति #लोकधरोहर #Devbhoomi

सोमवार, 2 मार्च 2026

रंग रंगिलो ईश्वर की लीला

🎵 “रंग रंगिलो — ईश्वर की लीला” 🎵
रंग रंगिलो आने रुणी हो,
यसी ईश्वर की लीला रंग रंगिलो।
ग्रीष्म रितु ज्येठ-अषाढ़ा,
घाम लागछी आग की चारा,
सुखनी गध्यार, नौला-धारा
इनू दिनों मा…
रंग रंगिलो…
हो सावन-भादव बज्र की धारा,
लुपलुपिया पाणी को हुच कच्यारा,
निराई-गुड़ाई, सिचाई हुची
इनू दिनों मा…
रंग रंगिलो…
हो अशोज-कार्तिक धान काटनी,
देव-दोनों के भोग लगूनी,
गडैरी, काकड़ी, मूली-पिनालू
इनू दिनों मा…
रंग रंगिलो…
हो मंगसिर-पूषा ह्यून का दिना,
ठंड दिनो मा नी रै सकिना,
बाज का चैनी, गिना का गिना,
पूषाक-पालक, लाल जड़िया
इनू दिनों मा…
रंग रंगिलो…बारहमासा ईश्वर की माया,
रंग बदलै हर इक छाया,
हँसी-ठिठोली प्रेम बढ़ाया,
जीवन भई रंग रंगिलो…
🎵 “रंग रंगिलो — ईश्वर की लीला” 🎵
रंग रंगिलो आने रुणी हो,
यसी ईश्वर की लीला रंग रंगिलो।
ग्रीष्म रितु ज्येठ-अषाढ़ा,
घाम लागछी आग की चारा,
सुखनी गध्यार, नौला-धारा
इनू दिनों मा…
रंग रंगिलो…
हो सावन-भादव बज्र की धारा,
लुपलुपिया पाणी को हुच कच्यारा,
निराई-गुड़ाई, सिचाई हुची
इनू दिनों मा…
रंग रंगिलो…
हो अशोज-कार्तिक धान काटनी,
देव-दोनों के भोग लगूनी,
गडैरी, काकड़ी, मूली-पिनालू
इनू दिनों मा…
रंग रंगिलो…
हो मंगसिर-पूषा ह्यून का दिना,
ठंड दिनो मा नी रै सकिना,
बाज का चैनी, गिना का गिना,
पूषाक-पालक, लाल जड़िया
इनू दिनों मा…
रंग रंगिलो…

रविवार, 1 मार्च 2026

बसंत और होली

य मस्ताना फागुन में, फिर चली मधुर पुरवाई छ,
फिर से होली आई छ, पर जेब खाली पाई छ…।।
गगन में उड़ी रंग हजार,
महँगाई मुस्काई छ,
अबीर–गुलाल छोड़ि सब
सेल्फी रंग छाई छ।
फिर से होली आई छ, पर जेब खाली पाई छ…।।
ढोल–दमाऊँ बाजन लागा,
डीजे धुन बजाई छ,
बैठकी होली छोड़ि कै सब
मोबाइल मा समाई छ।
फिर से होली आई छ, पर जेब खाली पाई छ…।।
बुरांश फुलि गै डांड्यों मैं,
पर नौजवान पलायन छ,
गांव सूना, चौपाल सूनी,
सपना सब प्रवासन छ।
फिर से होली आई छ, सोचण बैठि जाई छ…।।
गुजिया छोलें सूजी भितर,
आलू गुटुक बनाई छ,
थाली भरी चिप्सों ले
पर मँहगाई रुलाई छ।
फिर से होली आई छ, पर जेब खाली पाई छ…।।
हँसि–हँसि रंग लगौ सबनै,
बुरा न मानो भाई छ,
य फागुन सच बोलि द्यालो —
होली व्यंग्य सिखाई छ।
फेर से होली आई छ… मन की बात बताई छ…।।
देव सती पहाड़ी बटोही